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RadhaSoami Ques Ans with Baba Ji

सवाल :-
लड़की :- बाबाजी हमें समझाया जाता है की परमात्मा के द्वारा बनाया इंसान एक है फिर इंसान के बीच ये जात-पात क्यूँ ? शादी के लिए हमारे माता पिता जात पात से जुड़े सब कुछ करते है ऐसा क्यों बाबाजी ?
जवाब :-
देखो बेटा इंसान का दायरा बहुत छोटा है, इन्सान यही सोच-सोच कर जीता है कि मेरे रिश्तेदार क्या सोचेंगे, लोग क्या कहेंगे, इतना गलत करके भी वो दुनिया के रीत रीवाज तो चलते रहते है,पर हमें अपनी ख़ुशी देखनी चहिये, लोगो को कोई खुश नहीं कर सकता।

सवाल :-
लड़का :- बाबाजी मैं इस साल +2 मैं 63 % मार्क्स के साथ पास हुआ हूँ, बाबाजी मुझे इंजीनियरिंग में एड्मीसन लेना है, क्या मुझे एड्मीसन मिल जायेगा ?
जवाब :-
( बाबाजी हस्ते हुए ) बेटा इन्सान क्या नहीं कर सकते, अपने लक्ष को सामने रख कर मेहनत करो मालिक जरुर मेहर करेगा।

सवाल :-
लड़का :- बाबाजी मैं कुछ समय से सत्संग सुनता आ रहा हु, मुझे बहुत मज़ा आता है, सत्संग सुनके वो सत्संग का प्रभाव मेरे हृदय पे बहुत ही अच्छे पड़ता है पर बाबाजी कुछ दिनों से मुझे सत्संग सुनने में मज़ा नहीं आ रहा मुझे पहले की तरह कुछ महसूस नहीं हो रहा, ऐसा क्यों बाबाजी ?
जवाब :-
देखा बेटा हाथो की सभी उंगलिया सामान नहीं होती उसी तरह ही हमारा मन भी दुनियावी रंग देख के बदल जाता है बेटा हमें मालिक का प्यार हासिल करना है कोई मज़ा नहीं लेना इस तरह सोच कर बैठे रहोगे तो धीरे धीरे मालिक से दूर होते जाओगे।

सवाल :-
लड़की :- बाबाजी कई बार देखा जाता है कि जो सबकी हेल्प / मदद करता है हमेशा उसे ही दुःख क्यों मिलता है ऐसा क्यों बाबाजी ?
जवाब :-
बेटा सबको अपने कर्मों का हिसाब देना पड़ता है कुछ तो हमारे पिछले जन्म के कर्म साथ जुड़ जाते है, इस तरह हमें इस जनम में दुःख मिलता है और हमें कभी ये नहीं सोचना चाहिए की हमें दुख मिल रहा है, बल्कि मालिक का शुकरिया अदा करना चाहिए, जिससे की मालिक की याद भी आती रहेगी और अपने बुरे कर्मों का हिसाब इंसानी जीवन मे ही करने का मौका मिलता है।

सवाल :-
लड़का :- बाबाजी, हम नामदान के पहले आपको किस तरह खुश रख सकते है ?
जवाब :-
बेटा भजन सिमरन और अपने माता पिता की सेवा करके, बच्चो के लिए तो पहले माता पिता ही भगवान् का रूप है, आप उन्ह्को खुश रखो, बेटा मालिक अपने आप खुश हो जायेगा।

सवाल :-
लड़की :- बाबाजी, अग़र जाने अन्जाने मे कोई गलती हो जाये तो क्या उसका भी कर्म बनेगा ?
जवाब :-
बेटा अगर जाने अन्जाने में जहर पि लोगे तो कर्म तो उस का भी बन जाता है, हमें कभीभी ये नहीं सोचना चाहिए की इस चीज़ का कर्म बनेगा कि नहीं, कर्म हर एक चीज़ का बनता है, चाहे जान के करो या अन्जाने मैं करो।

सवाल :-
लड़की :- बाबाजी जीवन के कोई गहरे काल मैं फस जाते हैं तो उस से निकलना बहुत मुश्किल हो जाता है, ऐसे काल से कैसे निकला जा सकता है ?
जवाब :-
बेटा काल वगेरा कुछ नहीं होता, ये सब कहने की बात है और हमारे मन का वहम है, ये सब अपनी कमजोरी है और कुछ नहीं।

सवाल :-
लड़का :- बाबाजी क्या हम संगत के पैर नहीं छू सकते, क्या ये अच्छी बात नहीं ?
जवाब :-
बेटा क्यों नहीं छु सकते, अपने माता पिता और बुजुर्गो के पैर छुओ, लेकिन मन में नम्रता होनी चाहिए, ऐसा नहीं के मन में उनके लिए नम्रता न हो तो पैर छू के कारवाही करने का कोई फायदा नहीं।

सवाल :-
लड़की :- बाबाजी मुझे इस जनम में चाहे जितने दुःख दे दो पर में फिर से जनम नहीं लेना चाहती।
जवाब :-
बेटा आप ऐसा सोचते क्यों हो, जो कर्म का है वो तो मिलना ही है, मालिक भी चाहता है की उनके बच्चो को कोई दुःख न हो, पर जो आप उस मालिक के भाने मै रहकर भजन सिमरन करोगे तो मालिक जरुर मेहर करेगा बेटा।

सवाल :-
लड़की :- बाबाजी मेरे पापा बहुत भजन सिमरन करते हे और सेवा मै भी आते है पर उनका कोई भी कारोबार सेट नहीं होता, कोई भी काम में बरकत नहीं होती।
जवाब :-
देखो बेटा भजन सिमरन और सेवा को कभी भी गिनती मै नहीं ले के आना चाहिए, आप को ये सब मालिक की ख़ुशी के लिए ही करना चाहिए, जब कभी मालिक खुश होगा जरुर दया मेहर करेगा, और हमें भजन सिमरन और सेवा कभी भी ये सोचके नहीं चाहिए की हमें इस से कुछ लाभ होगा।

सवाल :-
लड़की :- बाबाजी जेसे की आप कहते हो की दुःख देने वाला भी मालिक है और दुःख दूर करने वाला भी मालिक ही है, अगर मालिक को ही दुःख दूर करना है तो मालिक दुःख देता क्यों है ?
जवाब :-
बाबाजी हसते हुए – बेटा मालिक हमारी परीक्षा लेता है।
लड़की :-बाबाजी फिर मालिक परीक्षा में पास कर देता है ?
बाबाजी :- बेटा देखो माँ अपने छोटे बच्चो को कहती है की चूल्हे मै हाथ मत लगाना उसमे आग है, पर जब तक बच्चे को उस आग की तपिश महसूस नहीं होती तब तक वो उस में हाथ डाले बिना नहीं रहता, ठीक उसी तरह ही इंसान है जब तक हमें अपने बुरे कामो का पता नहीं चलता तब तक मालिक हमारी परीक्षा लेता रहता है

सभी प्यारे सतसंगी भाई बहनों और दोस्तों को हाथ जोड़ कर प्यार भरी राधा सवामी जी…

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