1. लड़का- बाबाजी आप अपने पैर छूने से मन क्यों करते हो।
बाबाजी- बेटा हम पैर क्यों छूते हैं। इसलिए कि हम अपने बड़ों को ये बता सकें कि हम उनसे छोटे है और उनकी हर बात का मान रखते है उसे मानते है। आप बताओ आप मेरी कोनसी बात मानते हो। हर बार एक ही बात बोलता हूं फिर भी नहीं मानते। फिर क्या फायदा पैर छूने का।
(बाबाजी उसको जाते जाते – तूने ये निकर पहनी है तेरी टांगों के बाल देखकर को छुएगा तेरे पैर) संगत में हंसी का माहौल बन गया
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2. लड़की- बाबाजी डेरा कोन चलाता है।
बाबाजी (मजाक में) – बेटा डेरा तो सेवादार ही चलाते है पर सारा क्रेडिट मैं ले जाता हूं। मैं करता कुछ नहीं हूं पर सब मेरा नाम लेते है कि बाबजी ने कितना अच्छा किया है। जब सब सही हो जाता है तो मैं अपनी पीठ थपथपा देता हूं। (संगत में जोरदार ठहाका)
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3. लड़का- बाबजी मेरा पढ़ने में बिल्कुल दिल नही लगता क्या करूँ।
बाबाजी- शादी करले, फिर खुद मैन लगेगा। 2 या 3 बच्चे होंगे कोई तेरे को यहां ते तंग करेगा कोई तेरे बाल पकड़ेगा। फिर अच्छी तरह से पढ़ेगा। ( संगत हँसने लगी)
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4. लड़की – बाबजी हमारी dressing sense कितनी मायने रखती है।
बाबाजी – बेटा हमारे कपड़े हमारी मानसिकता को दर्शाते हैं। कपड़े वही पहने जो सबको अच्छे लगें। फैशन के नाम पर हमें कुछ भी नहीं पहन लेना चाहिए।
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5. लड़का- बाबाजी अगर डॉक्टर से इलाज के वक्त किसी की मौत हो जाये तो क्या डॉक्टर के कर्म बनेंगे।
बाबाजी- बेटा ये depend करता है कि स्थिति क्या है। अगर मरीज का रोग इतना बढ़ गया होगा कि डॉक्टर चाह कर भी कुछ न कर पाया हो तो डॉक्टर का कोई कर्म नही बनेगा। पर अगर डॉक्टर की गलती की वजह से मौत हुई हो तो डॉक्टर तो कर्म उठाना पड़ेगा बेटा।
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6. लड़का – बाबाजी जैसे हमारे पैरों के नीचे हजारों चींटियां और कीड़े मर जाते है तो क्या हमें कर्म उठाने पड़ेंगे।
बाबाजी – बिल्कुल बेटा, ये कर्म हमे ही उठाने पड़ेंगे।
लड़का – पर बाबाजी हमें थोड़ी पता है को चीटियां हमारे पैरों के नीचे मर रही है।
बाबाजी – अच्छा तो तुम जहर पी लो चाहे गलती से ही सही तो क्या मरोगे नही। पर इसके बारे में मत सोचो। भजन सिमरन इतना करो कि इसकी नोबत न आये।
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7. लड़का – बाबाजी मेरे पापाजी कहते है को मैं अपने दादा का रूप हु क्योंकि उनका देहांत और मेरा जन्म एक ही डेट को हुआ था। क्या ऐसा हो सकता है।
बाबाजी – अगर ऐसा है तो मौज लग गयी। पापा को डांटा कर, बोल जितने पैसे है यहां लाके रख दे मैं तेरा पापा हु ( संगत हँसने लगी)
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8. लड़का – बाबजी मुझे अपने साथ सिक्योरिटी में रख लो। मैं भी आपके साथ साथ चलूंगा।
बाबाजी – बेटा मेरे साथ जो जाना चाहता है या तो वो बीबीयों वाले सेक्शन में जाने के लिए आना चाहता है। तुम भी तो इसलिए नही आना चाहते ? अगर ऐसा है तो अगर किसी ऑन्टी ने पसंद करलिया तो पछतायेगा (संगत में जोरदार ठहाका)
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और सबसे बढ़िया सवाल
9. लड़की – बाबाजी जो माता पिता हमे दुनिया पर लेके आते है वो भगवान से भी बड़े है। हम भगवान को उनसे बड़े कैसे मान सकते है। ये तो गलत है। हमे माता पिता की पूजा करनी चाहिए
बाबाजी – बेटा दुनिया का हर रिश्ता किसी न किसी गरज से जुड़ा हुआ है। ये सुनने में अजीब लगता है पर माता पिता का रिश्ता भी एक मतलब से जुड़ा है। वो हमें इसलिए पाल पोस कर बड़ा करते है ताकि हम बुढ़ापे में उनका सहारा बन सके।
इसलिए बानी में भी कहा है ‘ कूड़ माता, कूड़ पिता, कूड़े सब संसार, कूड़ कूडे इंज लगा, विसरेया करतार।
वो एक परमात्मा ही है जिसके साथ हमारा रिस्ता बिना किसी मतलब के है।
पर इसका ये मतलब नही की हम मा बाप की इज्जत न करें। उनको प्यार करो, इज्जत करो, कहना मानो, उनको इलावा इस दुनिया मे हमारी कोई फिक्र नही करता। पर भगवान को सबसे ऊपर रखो।